श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारी। बरनाउॅ रघुवर बिमल जसु जो दायक फल चारि।। मैं अपने मन रूपी दर्पण को श्री गुरु जी के चरण कमलों की धूलि से पवित्र कर, श्री रघुवीर भगवान के निर्मल यश का गुणगान करता हूं जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों फलों को देने वाला है। बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरो पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार।। हे पवन कुमार मैं आपका स्मरण करता हूं, आप तो जानते ही होंगे कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल और सद्बुद्धि तथा ज्ञान प्रदान कीजिए और मेरे सभी दुखों व दोषों को नष्ट कर दीजिए। जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। हनुमान जी आपकी जय हो आप ज्ञान और गुण के सागर है। पाताल लोक, भूलोक और सवर्ग लोक इन तीनों लोकों में आपकी कीर्ति विद्यमान है। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।। हनुमान जी आप श्री राम जी के दूत हैं, आप बल के धाम है यानी आपके समान दूसरा कोई बलवान नहीं है। आप अंजनी माता के पुत्र हैं और पवन देव आपको अपना पुत्र मानते हैं। इसलिए संसार आपको पवनपुत्र नाम से भी जानता है। महावी...
यहां हम लोगों को यह बताते हैं की आप अपने जीवन को सरलता के साथ कैसे जी सकते हैं साथ ही साथ आपको प्रतिदिन की बड़ी खबरें भी मिलती रहेंगी।